Rahat indori shayari in hindi

जो मंसबो के पुजारी पहन के आते हैं

जो मंसबो के पुजारी पहन के आते हैं
कुलाह तौक से भारी पहन के आते है

अमीर शहर तेरे जैसी क़ीमती पोशाक
मेरी गली में भिखारी पहन के आते हैं

यही अकीक़ थे शाहों के ताज की जीनत
जो उँगलियों में मदारी पहन के आते हैं

इबादतों की हिफाज़त भी उनके जिम्मे हैं
जो मस्जिदों में सफारी पहन के आते हैं

राहत इन्दौरी

Rahat indori shayari in hindi

दिलों में आग लबों पर गुलाब रखते हैं

दिलों में आग लबों पर गुलाब रखते हैं
सब अपने चेहरों पे दोहरी नका़ब रखते हैं

हमें चराग समझ कर बुझा न पाओगे
हम अपने घर में कई आफ़ताब रखते हैं

बहुत से लोग कि जो हर्फ़-आश्ना भी नहीं
इसी में खुश हैं कि तेरी किताब रखते हैं

ये मैकदा है, वो मस्जिद है, वो है बुत-खाना
कहीं भी जाओ फ़रिश्ते हिसाब रखते हैं

हमारे शहर के मंजर न देख पायेंगे
यहाँ के लोग तो आँखों में ख्वाब रखते हैं

राहत इन्दौरी

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