Rahat indori shayari in hindi

कभी अकेले में  मिल कर झंझोड़ दूंगा उसे

कभी अकेले में  मिल कर झंझोड़ दूंगा उसे
जहाँ जहाँ से वो टूटा है जोड़ दूंगा उसे

मुझे छोड़ गया ये कमाल है उस का
इरादा मैंने किया था के छोड़ दूंगा उसे

पसीने बांटता फिरता है हर तरफ सूरज
कभी जो हाथ लगा तो  निचोड़ दूंगा उसे

मज़ा चखा के ही माना हूँ  मैं भी दुनिया को
समझ रही थी  के ऐसे ही छोड़ दूंगा उसे

बचा के रखता है खुद को वो मुझ से शीशाबदन
उसे ये डर है  के तोड़फोड़ दूंगा उसे

राहत इन्दौरी

 

वफ़ा  को  आज़माना  चाहिए  था , हमारा  दिल  दुखाना  चाहिए  था

वफ़ा  को  आज़माना  चाहिए  था , हमारा  दिल  दुखाना  चाहिए  था
आना  न  आना  मेरी  मर्ज़ी  है ,

तुमको  तो  बुलाना  चाहिए  थाहमारी  ख्वाहिश  एक  घर  की  थी,

उसे  सारा  ज़माना  चाहिए  था

मेरी  आँखें  कहाँ  नाम  हुई  थीं,   समुन्दर को  बहाना  चाहिए  था जहाँ  पर  पंहुचना  मैं  चाहता  हूँ,

वहां  पे  पंहुच  जाना  चाहिए  था
हमारा  ज़ख्म  पुराना  बहुत  है,  चरागर भी  पुराना  चाहिए  थामुझसे  पहले  वो  किसी  और  की थी,

मगर  कुछ  शायराना  चाहिए  था
चलो  माना  ये  छोटी  बात  है,  पर  तुम्हें  सब  कुछ  बताना  चाहिए  था

तेरा  भी  शहर  में  कोई  नहीं  था,  मुझे  भी  एक  ठिकाना  चाहिए  था
कि  किस  को  किस  तरह  से  भूलते  हैं,  तुम्हें   मुझको  सिखाना  चाहिए  था

ऐसा  लगता  है  लहू  में  हमको , कलम  को  भी  डुबाना चाहिए  था
अब  मेरे  साथ  रह  के  तंज़  ना कर , तुझे  जाना  था  जाना  चाहिए  था

क्या  बस  मैंने  ही  की  है  बेवफाई  ,जो  भी  सच  है  बताना  चाहिए  था
मेरी  बर्बादी  पे  वो  चाहता  है , मुझे  भी  मुस्कुराना  चाहिए  था

बस  एक  तू  ही  मेरे  साथ  में  है , तुझे  भी  रूठ  जाना  चाहिए  था
हमारे  पास  जो  ये  फन है  मियां,  हमें  इस  से  कमाना  चाहिए  था

अब  ये  ताज  किस  काम का  है,  हमें  सर  को  बचाना  चाहिए  था
उसी  को  याद  रखा  उम्र  भर  कि , जिसको  भूल  जाना  चाहिए  था

मुझसे  बात  भी  करनी  थी,  उसको  गले  से  भी  लगाना  चाहिए  था
उसने  प्यार  से  बुलाया  था,  हमें  मर  के  भी  आना  चाहिए  था

तुम्हे  ‘सतलज ‘ उसे  पाने  की  खातिर,  कभी  खुद  को  गवाना  चाहिए  था !

राहत इन्दौरी

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