Rahat indori shayari in hindi


बीमार को मरज की दवा देनी चाहिए

बीमार को मरज की दवा देनी चाहिए
मैं पीना चाहता हूं, पिला देनी चाहिए

अल्लाह बरकतों से नवाजेगा इश्क़ में
है जितनी पूंजी पास लगा देनी चाहिए

ये दिल किसी फ़क़ीर के हुजरे से कम नहीं
दुनिया यहीं पे ला के छुपा देनी चाहिए

मैं ताज हूं तो सर पे सजाएं लोग
मैं ख़्वाब हूं तो ख़्वाब उड़ा देनी चाहिए

सौदा यहीं पर होता है हिन्दुस्तान का
संसद भवन को आग लगा देनी चाहिए

राहत इंदौरी

काम सब गैर-ज़रूरी हैं जो सब करते हैं

काम सब गैर-ज़रूरी हैं जो सब करते हैं
और हम कुछ नहीं करते हैं, ग़ज़ब करते हैं

हम पे हाकिम का कोई हुक्म नहीं चलता है
हम कलंदर हैं, शहंशाह लक़ब* करते हैं

आप की नज़रों में सूरज की है जितनी अजमत
हम चिरागों का भी उतना ही अदब करते हैं

देखिये जिसको उसे धुन है मसीहाई की
आजकल शहरों के बीमार मतब* करते हैं

लक़ब  =  उपाधि
मतब = अस्पताल

राहत इंदौरी

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